Friday, 2 April 2021

महाभारत।

महाभारत के युद्ध मे एक बात सोचने वाली है कि अगर दुर्योधन के कहने पर सात महारथियों ने अभिमन्यु को घेर कर मार डाला था, तो वह बड़ा अधर्म था! फिर जब घायल कर्ण, जिसके रथ का पहिया जमीन मे धंस गया था, और वह धनुष उठाने के स्थिति मे नही था, फिर भी अर्जुन ने उसका वध किया.. क्या यह धर्म था?

चोरी का बदला चोरी कभी धर्म हो सकता है?
कपट का बदला कपट कभी धर्म हो सकता है?

अगर कौरव अधर्मी थे, तो पाण्डव कैसे धर्मी हो गये यह बात सोचने वाली है!
हद तो तब है कि ये सारे अधर्म श्रीकृष्ण के ईशारे पर किये गये!

महाभारत के कर्णपर्व मे लिखा है कि कर्ण ने अर्जुन से निवेदन किया था कि ' हे अर्जुन! जो युद्ध से भागा हो, जिसके अस्त्र-शस्त्र गिर गये हो और जो घायल हो क्षत्रिय उस पर बाण नही चलाते, अतः तुम रूको... मै रथ का पहिया निकालकर तुमसे युद्ध करता हूँ '

ऐसी स्थित मे अर्जुन तो मान गया, पर कृष्ण ने उसे उकसाकर कर्ण का वध करवाया!
कोई बतायेगा कि कृष्ण कौन से धर्म का पालन कर रहे थे?
जब स्वयं इतने बड़े महापुरुष अधर्म करने के लिये अर्जुन से कह रहें थे, तो फिर कृष्ण धर्मनिष्ठ कैसे हुये!

कृष्ण तो वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों के ज्ञाता थे! मनुस्मृति-7/93 मे मनु ने लिखा है-
"नायुधव्यसनप्राप्तं नार्तं नातिपरिक्षतम् ।
न भीतं न परावृत्तं सतां धर्ममनुस्मरन् ।।"
अर्थात- जिसका आयुध टूट गया हो, शोकाकुल हो, अत्यन्त घायल हो, जो भयभीत हो, युद्ध से भागा हो, ऐसे शत्रु को शिष्ट क्षत्रिय का धर्म स्मरण कर न मारें।

क्या मनु का विधान भी कृष्ण भूल गये थे! मै सदैव कहता हूँ कि महाभारत कृष्ण की स्तुति और पाण्डवों के साथ सहानुभूति रखकर लिखी गयी पुस्तक है, अन्यथा पाण्डव तो कौरवों से भी अधिक अधर्मी थे!

       ......अमित कुमार भारती.......
"भारत एकता मिशन अम्बेडकर (लक्ष्य करोड़ों मूलनिवासियों के अपना अधिकारों का)"
#अमित कुमार भारती#
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🙏......✍️✍️ अमित कुमार भारती

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