Friday, 2 April 2021

राम, रामायण ज्ञान, राम चरित।

■■■■

वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के सर्ग 75 और 76 में  राम द्वारा तपस्या करने पर एक शूद्र तपस्वी शंबूक की हत्या किए जाने का प्रसंग है,
जो कि राम को निरंकुश हत्यारा साबित करने के लिए पर्याप्त है, 
सर्ग 75 में वैश्य समाज को भी शूद्र के समकक्ष समान कार्य करना लिखा है  यानी एक तरह से  जनेऊ वाले  शूद्र ?
जब रामायण कहती है शूद्रों को पूजा पाठ करना मना है शूद्र के पूजा पाठ करने से धर्म भ्रष्ट होता है तो ब्राह्मण और क्षत्रियों को अपने धर्म की रक्षा करनी ही पड़ेगी ? 
यहीं से प्रेरणा लेकर ब्राह्मण, क्षत्रिय वर्ग शूद्रों की हत्या तक कर देते हैं क्योंकि उनके भगवान राम ने खुद शंबूक की हत्या की थी इसीलिए शूद्रों को मंदिर जाने पर पीटा जाता है उनकी हत्या तक कर दी जाती है,
और ये मूर्ख शूद्र उसे ही अपना भगवान मानते हैं, जिसने शूद्रों के दमन, शोषण, उत्पीड़न, हत्या की आधारशिला रखी,
कब सुधरोगे मूर्खों, 
खुद भी जिल्लत की जिंदगी जिओ और अपनी  पीढ़ियों के लिए भी जिल्लत की जिंदगी आरक्षित करके जाओगे ?
बनो धर्ममुक्त, ईश्वर और धर्म के पाखंड से मुक्त,

                       *****अमित कुमार भारती*****
"भारत एकता मिशन अम्बेडकर (लक्ष्य करोड़ों मूलनिवासियों के अपना अधिकारों का)"
#अमित कुमार भारती#
https://www.facebook.com/groups/405657667349424/?ref=shareमिशन अंबेडकर इंटरनेशनल नेटवर्क 🌏 symbol of knowledge बाबा साहब अंबेडकर 
🙏......✍️✍️ अमित कुमार भारती
😀😛😜



■■■

वाल्मिकी रामायण मे सिता के स्तनो का वर्णन 

रावण द्वारा सिता हरण के बाद राम विलाप करते हुये लक्ष्मण से कहते है 👇 

मेरी प्रिया के वे दोनो #गोल गोल #स्तन जो सदा लाल #चंदनसे चर्चित होने योग्य थे वो #रक्त कि किचमें सन  गये होंगे. 
हाय..! इतनेपर भी मेरे शरीर का पतन नही होता. 

(वाल्मिकी रामायण,अरण्यकांड 63, श्लोक आठ)



■■■■■

आइए मित्रों,
 भक्तों के भगवान राम की सप्त मर्यादाओं का चीरहरण करते हैं!
उनकी सातों मर्यादाएं नीचे लिखी हैं 
सप्त मर्यादाः कवयस्ततकक्षुस्तासामेकामिदभ्यहुरो-गात् |
आयोर्ह स्कम्भ उपमस्य निव्वे पथां विसर्गे धरु धरुणेषु तस्थौ || ऋ० १०|१५|०६

अर्थात् हिंसा, चोरी, व्यभिचार, मद्यपान, जुआ, असत्य-भाषण और इन पापों के करने वाले दुष्टों के सहयोग का नाम सप्त्मर्यादा हैं | जो एक भी मर्यादा का उल्लघंन  करता हैं वो पापी कहलाता हैं और जो धैर्य से इन हिंसादी पापों को छोड़ देता हैं, वह निसंदेह जीवन का स्तंभ और मोक्ष भागी होता हैं |

तो आपने पढ़ा कि एक भी मर्यादा का उल्लंघन भक्तों के भगवान राम को पापी साबित कर देगा !
हिंसा -
अहिंसक उसे कहते हैं जो किसी भी स्थिति में किसी के भी प्राण ना ले परंतु राम का चरित्र नर संहार से भरा हुआ है, अब आप कहेंगे कि वे तो धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाते थे मरने वाले सब राक्षस थे,
तो मित्रों  शूद्र शंबूक की हत्या वाल्मीकि रामायण में वर्णित है क्या वो एक व्यक्ति के प्रति हिंसा नहीं है फिर कोई भी युद्ध  हिंसा के बिना कैसे संभव है ?
और हाँ  राम  मांसाहारी भी  थे शिकार करते थे क्या ये पशु हिंसा नहीं थी  ?
राम के अश्वमेध यज्ञ में  पशु बलि देना हिंसा नहीं है  ?
पहली मर्यादा यहाँ टूटती है शूद्र शंबूक की हत्या का प्रमाण संलग्न है,

मद्यपान -
लगता है  भक्तों  ने रामायण ठीक से नहीं पढ़ी, लंका से आने के बाद भक्तों के भगवान राम स्वयं  सीता को मदिरा पिलाते  हैं इसका भी प्रमाण वाल्मीकि रामायण से आपको देता हूँ!

लो मित्रों भक्तों के भगवान दो मर्यादाओं में अनुत्तीर्ण होते हैं अब आप बताएँ कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम  ?

"भारत एकता मिशन अम्बेडकर (लक्ष्य करोड़ों मूलनिवासियों के अपना अधिकारों का)"
#अमित कुमार भारती#
https://www.facebook.com/groups/405657667349424/?ref=shareमिशन अंबेडकर इंटरनेशनल नेटवर्क 🌏 symbol of knowledge बाबा साहब अंबेडकर 
🙏......✍️✍️ अमित कुमार भारती




********






No comments:

Post a Comment

Etc3

  ****** ***** ***** ****