गोरा और 100 वर्ष तक जिने वाला पुत्र प्राप्त करने के उपाय 👉 बृहदारण्यकोपनिषद
अभी तक हमने आर्य समाजी और हिंदुत्ववादीओ के मुह से ये बाते सुनी होगी कि वैदिक काल का विज्ञान आधुनिक विज्ञान से भी उन्नत था.
लेकिन आज आर्य समाजी और हिंदुत्ववादीओ के दावे प्रमाण मुझे बृहदारण्यकोपनिषद मे मिल गया.
बृहदारण्यकोपनिषद मे लिखा है ...
जो पुरुष चाहता हो कि मेरा पुत्र #शुक्ल_वर्णका हो,एक वेद का अध्ययन करे,और पुरे सौ वर्षोकी आयुतक जिवित रहे,उस दशा मे वे दोनो पति-पत्नि #दुध और #चावल को पका कर खिर बना ले.
और उसमे #घी मिलाकर खाये.
इससे वे उपयुक्त योग्यता वाले पुत्र को उत्पन्न करने मे समर्थ होते है.
(बृहदारण्यकोपनिषद 6-4-14,शंकरभाष्य,गिताप्रेस पृष्ठ 1351)
उपर के श्लोक पर 5 वी मे पढने वाला विद्यार्थी भी बहोत सारे आक्षेप कर सकता है.
इसलिए हम समय के कमी के कारण अपने आक्षेप नही लिख रहे है
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