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-----अथर्ववेद- भाग-२------
---कहते हैं आर्यों के वेदों में ज्ञान है,पर आपको पिछले 38 आर्टिकल्स में ऋग्वेद भाग-१,ऋग्वेद-भाग-२,ऋग्वेद- भाग-३,
ऋग्वेद- भाग-४,सामवेद, अथर्ववेद -भाग-१ के माध्यम दिखा चुका हूं,कि इनके किसी ही वेद में कहीं कोई ज्ञान और विज्ञान दिखाई नहीं दिया,दिखाई दिया तो केवल साम,दाम,दंड,भेद की नीति से निरीह और निर्दोष लोगों को राक्षस, दैत्य,दानव, असुर बताकर कत्लेआम,विनाश, विध्वंस और लूटपाट,इसी तरह इनका अथर्ववेद-जादू,टोना,टोटका, काल्पनिक निरर्थक कर्मकांड से भरा पड़ा है ,जिसका उपयोग इन्होंने लोगों को उल्लू बनाकर ठगने में जमकर प्रयोग किया है-
अथर्ववेद में भूत -प्रेत ,टोने - टोटके और शत्रुविनाश आदि के लिए किये जाने वाले तान्त्रिक प्रयोगों को ' अभिचारिक कर्म ' अथवा ' कृत्या प्रतिहारक कर्म ' कहा जाता है इस प्रकार के प्रयोगों में वे मन्त्र आते हैं ,जो प्रतिद्वन्द्विता के सूचक हैं इन मन्त्रों में देवों का आह्वान करके रोगों और दोषों का निवारण करने की प्रार्थना की जाती है,अथर्ववेद में ' मन्त्र विद्या ' को इन पांच भागों में विभाजित किया गया है
1 . संकल्प अथवा आवेश मन्त्र ,
2 . अभिमर्षण अथवा मार्जन मन्त्र ,
3 . आदेश मन्त्र ,
4 . मणिबन्धन मन्त्र और
5 कृत्या अथवा अभिचार मन्त्र-
संकल्प मन्त्रों में दुःस्वप्न ,दु :ख , दुष्प्रवृत्तियों में रत ,पाप ,शाप आदि के प्रभाव को दूर करने के लिए मन्त्रों का प्रयोग किया जाता है इसमें प्रायोजक रोगी अथवा दुखी प्राणी के सिर पर हाथ रखकर मन्त्र पढ़ते हुए रोगी को नीरोग और सुखी होने का संकल्प कराता है .
अभिमर्षण या मार्जन मन्त्रों में रोगी अथवा दोषी व्यक्ति के शरीर का स्पर्श करके मन्त्र पढ़े जाते हैं ' अभिमर्षण ' का अर्थ है , दोनों हाथों की अंगुलियों से रोगी के शरीर के अंगों को ऊपर से नीचे तक स्पर्श करना.
आदेश मन्त्रों में मन्त्रों की भावना के अनुसार रोग ,दोष ,मानसिक विकार आदि को दूर किया जाता है अथर्ववेद में इसे ' संवशीकरण ' भी कहा गया है,चंचल प्रवृत्ति के लोगों पर इसका प्रयोग तत्काल प्रभाव डालता है,घमण्डी और पागलपन लिये हुए व्यक्तियों पर आदेश मन्त्रों का सीधा प्रभाव पड़ता है,इन आदेश मन्त्रों द्वारा पागलों ,उद्दण्ड लोगों ,डाकुओं , हत्यारों ,दुराचारियों ,नशाखोरों , आलसियों ,ईष्र्यालुओं ,चिन्तातुरों आदि को अपने वश में किया जा सकता है,घातक और असाध्य रोगों को भी आदेश मन्त्रों द्वारा ठीक किया जा सकता है.
मणिबन्धन मन्त्रों में युद्ध में विजय ,शत्रु -पराजय ,अनिष्ट , दुर्भाग्य ,पाप ,शाप आदि को सिद्ध करने और उनसे बचने का उपाय किया जाता है ' मणि ' का तात्पर्य अथर्ववेद में लताओं , वृक्षों की जड़ों ,फूल -फल और बीज आदि को अभिमन्त्रित करके तावीज आदि में भरकर शरीर के किसी अंग में बांधना होता है,या शत्रु पर फेंका जाता है.
कृत्या अथवा अभिचार मन्त्रों में मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,कीलन , विद्वेषण और वशीकरण के मन्त्र आते हैं,अथर्ववेद में इनके प्रभाव को दूर करने के लिए 32 मन्त्रों द्वारा हवन करने का विधान बताया गया है ,ये सभी कर्म ' अरिष्ट ' में आते हैं,जैसा कि पहले लिखा जा चुका है कि कृत्या या अभिचारविषयक मन्त्रों में देवों का आह्वान किया जाता है अथर्ववेद के 2 / 14वें सूक्त में तथा 3 / 9वें सूक्त में इन मन्त्रों का उल्लेख है,यहां कष्ट -निवारण के लिए देवों और भूत -प्रेतों का आह्वान किया जाता है,इस प्रकार के तन्त्र -प्रयोग अभिचारिक या कृत्या प्रतिहारक कहे जाते हैं ' स्त्रीवशीकरण ' के लिए अथर्ववेद में अनेक मन्त्रों का प्रयोग हुआ है अथर्ववेद के 3 / 25 , 4 / 5 , 6 / 13 , 7 / 90 सूक्तों में ऐसे मन्त्र दिये गये हैं ,ये वशीभूत करने के अमोघ सिद्ध मन्त्र हैं.
इस प्रकार मनुष्य के चित्त ,हृदय और मन को वश में करने के लिए तन्त्र विद्या का प्रयोग किया जाता है ,दाम्पत्य जीवन की सुख - समृद्धि के लिए इस तन्त्र -शक्ति का प्रयोग अथर्ववेद में स्थान - स्थान पर किया गया है,अथर्ववेद में ' भूत ,प्रेत ,पिशाच ' की बाधा दूर करने के लिए 2 / 14 / 3 मन्त्रों का प्रयोग किया गया है ' गृह ,पशु और मनुष्यों की सुरक्षा ' आदि के लिए 3 / 9 / 4 मन्त्रों को देखना चाहिए,' विवाह योग्य कन्या के विवाह के लिए ' 2 / 36 / 6 - 60 के मन्त्रों का प्रयोग करना चाहिए ,पति -पत्नी के बीच मनमुटाव ' को दूर करने के लिए अथर्ववेद के 6 / 133 सूक्त के मन्त्रों का प्रयोग करना चाहिए ‘ प्रतिद्वन्द्वी ,प्रतिपक्षी ,प्रतिद्वेषी , शत्रु ,वादी ,प्रतिवादी 'को सम्मोहित करने के लिए अथर्ववेद के 3 / 1 सूक्त को सम्मोहन विधि से अभिमन्त्रित करना चाहिए अथर्ववेद में ,भूत -प्रेतों द्वारा अभिचार कर्म करने वाले अथवा ' इन्द्रजाल ' द्वारा अद्भुत कर्म करने वालों को ' यातुधान ' कहा गया है उनमें और राक्षसों में कोई भेद नहीं है-
इस तरह यहां आपनें पुनः देखा कि अथर्ववेद में लोगों को उल्लू बनाकर काल्पनिक बेहूदगी का अपनी जेब और अपना पेट भरने के लिए जमकर प्रयोग किया,इसी तरह की और अधिक जानकारी के लिए बनें रहिये प्लेटफार्म पर-
अथर्ववेद -भाग-२-
पृष्ठ-19-20-21.
---------मिशन अम्बेडकर.
"भारत एकता मिशन अम्बेडकर (लक्ष्य करोड़ों मूलनिवासियों के अपना अधिकारों का)"
#अमित कुमार भारती#
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🙏......✍️✍️ अमित कुमार भारती
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